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रायपुर : स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल के लिए छत्तीसगढ़ में लगाए गए हैं 227 फ्लोराइड निवारण संयंत्र

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भू-जल स्रोतों के 56,388 नमूनों में फ्लोराइड की जांच

रायपुर. 26 सितम्बर 2014

राज्य शासन के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने फ्लोराइड प्रभावित बसाहटों में लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल मुहैया कराने के लिए 227 फ्लोराइड निवारण संयंत्रों की स्थापना की है। विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ के भू-जल स्रोतों में फ्लोराइड की मात्रा की जांच के लिए 26 जिला स्तरीय प्रयोगशालाएं स्थापित की गई है। इन प्रयोगशालाओं में तीन वर्षों में भू-जल स्रोतों के 56 हजार 388 नमूनों का परीक्षण किया गया है। प्रदेश भर की 328 बसाहटों के नमूनों में फ्लोराइड की अधिकता पाई गई है। फ्लोराइड प्रभावित बसाहटों में लोगों को पीने का साफ पानी मुहैया कराने के लिए विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में राज्य शासन ने वित्तीय वर्ष 2012-13 में पांच करोड़ 62 लाख रूपए से अधिक की राशि खर्च की है।

      प्रदेश के 26 जिलों में स्थापित जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं में जशपुर जिले में सात हजार 541, जिला अंबिकापुर में पांच हजार 495, जिला सुकमा में पांच हजार 102, जिला दुर्ग में चार हजार 292, जिला राजनांदगांव में तीन हजार 754, जिला रायपुर में तीन हजार 386, जिला नारायणपुर में तीन हजार 365 और जिला कबीरधाम में तीन हजार 253 जल स्रोतों के नमूनों का परीक्षण किया गया है। जिला कोरबा में दो हजार 711, जिला धमतरी में दो हजार 431, जिला बिलासपुर में दो हजार 258, जिला बीजापुर में एक हजार 876, जिला कोरिया में एक हजार 788, जिला दंतेवाड़ा में एक हजार 731, जिला कांकेर में एक हजार 466, जिला रायगढ़ में एक हजार 387, जिला बस्तर में एक हजार 79, जिला जांजगीर-चांपा में 922, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज में 547, जिला गरियाबंद में 500, जिला बेमेतरा में 420, जिला महासमुंद में 388, जिला मुंगेली में 373, जिला बालोद में 183 और जिला सूरजपुर में 144 नमूनों में फ्लोराइड की मौजूदगी का परीक्षण किया जा चुका है।

 

क्रमांक-2020/कमलेश

Date: 
26 Sep 2014