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रायपुर : मनरेगा स्थापना दिवस पर छत्तीसगढ़ सम्मानित हुआ राष्ट्रीय पुरस्कारों से

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प्रदेश को एक साथ मिले पांच पुरस्कार

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जनता को दी बधाई

सम्पूर्ण राज्य को मनरेगा के सफल क्रियान्वयन पर दिए गए दो राष्ट्रीय पुरस्कार

कनवर्जेन्स श्रेणी में प्रथम पुरस्कार: इसके अलावा सूचना, शिक्षा और संचार में भी राष्ट्रीय पुरस्कार

लीडरशिप श्रेणी में राजनांदगांव जिले को पुरस्कृत किया गया  
नक्सल पीड़ित बीजापुर जिला भी पुरस्कृत

बालोद जिले की ग्राम पंचायत खरथुली को भी नवाजा गया पुरस्कार से

 

रायपुर, दो फरवरी 2014

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को केन्द्र सरकार से लगातार मिल रहे राष्ट्रीय पुरस्कारों की श्रृंखला में राज्य के खाते में आज एक और नया तथा गौरवशाली अध्याय जुड़ गया,  जब प्रदेश ने एक दिन में पांच राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करने का कीर्तिमान बनाया।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के स्थापना दिवस के अवसर पर आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री जयराम रमेश ने छत्तीसगढ़ को इस योजना के तहत पांच राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया। इनमें से दो पुरस्कार सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य को प्रदान किए गए। मनरेगा के तहत छत्तीसगढ़ को प्रथम पुरस्कार राज्य के गांवों में वर्ष 2012-13 में मनरेगा के आवंटन तथा अन्य विकास विभागों की योजनाओं को मिलाकर कनवर्जेन्ंस श्रेणी में दो हजार 232 करोड़ रूपए की धनराशि से गांवों में बारह करोड़ दस लाख मानव दिवस का रोजगार सृजन करने और आजीविका के स्थायी साधनों के विकास पर दिया गया। इसके अलावा इस योजना में सूचना, शिक्षा और संचार के बेहतरीन इस्तेमाल के लिए भी राज्य को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अन्य तीन पुरस्कारों में से एक पुरस्कार प्रदेश के नक्सल पीड़ित बीजापुर जिले को चुनौती पूर्ण परिस्थितियों में मनरेगा के शानदार क्रियान्वयन के लिए दिया गया। एक पुरस्कार राज्य के राजनांदगांव जिले को लीडरशीप श्रेणी में और दूसरा पुरस्कार बालोद जिले की ग्राम पंचायत खरथुली को प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इन उपलब्धियों के लिए प्रदेश की जनता को और राजनांदगांव तथा बीजापुर जिलों के साथ ग्राम पंचायत खरथुली के लोगों को भी बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह छत्तीसगढ़ की जनता की मेहनत और प्रदेश सरकार की एक बेहतरीन कार्य संस्कृति का उत्साह जनक परिणाम है कि विभिन्न योजनाओं में छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों को विगत कुछ वर्षों में अनेक राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। हमारी उपलब्धियों को केन्द्र सरकार ने अपने मूल्यांकन में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी है और राज्य को पुरस्कृत किया है। पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री श्री अजय चन्द्राकर ने भी प्रदेशवासियों को बधाई दी है। पुरस्कार वितरण समारोह में केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री जयराम रमेश ने भी छत्तीसगढ़ सरकार और राज्य की जनता को इन राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए बधाई दी।
नई दिल्ली में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह छत्तीसगढ़ सरकार को प्रदत्त दोनों राष्ट्रीय पुरस्कार पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री विवेक ढांड ने ग्रहण किया। इसी कड़ी में जिला पंचायत राजनांदगांव की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती प्रियंका शुक्ला ने राजनांदगांव जिले के लिए और ग्राम पंचायत खरथुली के सरपंच श्री गौरांग पिस्दा ने अपनी ग्राम पंचायत के लिए केन्द्रीय मंत्री से पुरस्कार प्राप्त किए। बीजापुर जिले का पुरस्कार वहां के कलेक्टर श्री मोहम्मद कैसर अब्दुल हक के अपरिहार्य कारणों से नहीं आ पाने के कारण उनके जिले का पुरस्कार राजनांदगांव जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती प्रियंका शुक्ला ने ग्रहण किया। अपर मुख्य सचिव श्री विवेक ढांड ने पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ में मनरेगा के तहत हो रहे रोजगार मूलक कार्यों तथा ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले पुरस्कार के लिए प्रतिवेदित वर्ष में राज्य की ग्राम पंचायतों ने इस योजना के तहत 60 प्रतिशत राशि मजदूरी पर व्यय करने के प्रावधानों से कहीं ज्यादा लगभग 76 प्रतिशत राशि व्यय की है। श्री ढांड ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मनरेगा के तहत रोजगार सृजन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसके फलस्वरूप गांवों से रोजगार की तलाश में होने वाला श्रमिकों का पलायन भी न्यूनतम हो गया है। अपर मुख्य सचिव ने यह भी बताया कि बस्तर और सरगुजा राजस्व संभागों में इस योजना के तहत कराए गए कार्यों के फलस्वरूप लघु सिंचाई संसाधनों में इजाफा हुआ है। इसके फलस्वरूप धान के उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। राज्य का एक बड़ा हिस्सा आरक्षित वन क्षेत्रों में आता है। वहां के निवासियों को रोजगार देने के लिए भी मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के निर्देश पर विशेष कार्य-योजना बनाकर रोजागर मूलक कार्य कराए गए हैं। इसके अंतर्गत वन अधिकार मान्यता पत्र धारक 53 हजार से ज्यादा परिवारों के खेतों के समतलीकरण के साथ-साथ उन्हें सिंचाई सुविधा दिलाने के लिए डबरी और कुएं भी बनवाए गए हैं। मनरेगा में राज्य के दो लाख 44 हजार से ज्यादा परिवारों को सालाना सौ दिन से ज्यादा रोजगार मिला है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ सरकार ने स्वयं अपने बजट से 50 अतिरिक्त दिनों का रोजगार देने की भी व्यवस्था की है। अब राज्य में मनरेगा के तहत श्रमिकों को एक वर्ष में डेढ़ सौ दिनों के रोजगार की पात्रता है।
मनरेगा में ‘अभिसरण (कनवर्जेन्स) के माध्यम से स्थायी आजीविका’ यानी कन्वर्जेन्स श्रेणी में छत्तीसगढ़ को पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। इस योजना में ? लीडरशिप श्रेणी में वर्ष 2012-13 के लिये प्रदेश के राजनांदगांव जिले का चयन किया गया है। इतना ही नहीं बल्कि इस योजना के तहत उत्कृष्ट कार्याे में वर्ष 2012-13 के लिये प्रदेश के बालोद जिले की ग्राम पंचायत खरथुली को राष्ट्रीय पुरस्कार घोषित किया गया है। जिला स्तर के राष्ट्रीय पुरस्कार हेतु चयनित 09-जिलों में छत्तीसगढ़ का राजनांदगाँव जिला तथा ग्राम पंचायत स्तर के राष्ट्रीय पुरस्कार हेतु चयनित 11-ग्राम पंचायतों में बालोद जिले के डौंडीलोहारा विकासखंड की ग्राम पंचायत खरथुली शामिल है। राजनांदगांव जिले में मनरेगा के तहत सर्वाधिक 29 हजार 367 परिवारों को 100-दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया गया है। यह जिला सालाना एक सौ दिवस का रोजगार देने के मामले में पूरे देश के 82-आई.ए.पी. जिलों के प्रथम-7 जिलों में शामिल है। योजना प्रारंभ होने से लेकर अब तक निर्माण कार्यों की पूर्णता में जहाँ जिला-राजनांदगाँव 93.4 प्रतिशत कार्य पूर्ण करके छत्तीसगढ़ में सबसे आगे है, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम 10-जिलों में से भी यह एक है। राज्य में वित्तीय वर्ष 2012-13 में मनरेगा के तहत लेबर बजट के लक्ष्य एक लाख 62 हजार 194 परिवारों के विरुद्ध दो लाख 27 हजार 589 परिवारों को रोजगार दिया गया है। जिले में योजनांतर्गत महिलाओं की सहभागिता भी उल्लेखनीय रही है। उपलब्ध कराये गये रोजगार में महिलाओं की सहभागिता 55 प्रतिशत रही।
अधिकारियों के अनुसार ग्राम पंचायत-खरथुली को यह पुरस्कार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत विŸाीय वर्षः 2012-13 में योजना संबंधी जागरुकता हेतु किये गये कार्य, विभिन्न श्रेणी के कार्यों के क्रियान्वयन विशेषकर भूमि-सुधार के कार्य एवं बैंक के माध्यम से मजदूरी भुगतान करने जैसे प्रयासों के लिये दिया गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिलाओं द्वारा सृजित श्रमदिवसों में विगत तीन वर्षों में लगातार वृद्धि दर्ज की गयी है, वहीं रोजगार प्राप्त करने वालों में महिलाओं की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत रही है। हितग्राही मूलक कार्यों के अंतर्गत हल्बा जाति के हितग्राहियों को पशुओं के लिए पक्का फ्लोर एवं यूरिन टैंक निर्माण जैसे कार्यों से लाभान्वित किया गया है।

 

 क्रमांक-3660/स्वराज्य
 

Date: 
02 Feb 2014