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छत्तीसगढ़ की विकास दर अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय: राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी

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देश के सबसे कम बेरोजगारी वाले राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ को मिला पुरस्कार: राष्ट्रपति के हाथों मुख्यमंत्री ने ग्रहण किया सम्मान

बेरोजगारी दूर करने योजनाबद्ध प्रयास: डॉ. रमन सिंह

    रायपुर,15 दिसंबर 2012

राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने छत्तीसगढ़ सहित देश के कुछ अन्य राज्यों में हो रहे सामाजिक आर्थिक विकास का उल्लेख करते हुए कहा है कि सभी राज्यों को इनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है। उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ का उल्लेख किया और कहा कि नया राज्य होने के बावजूद छत्तीसगढ़ ने पिछले कुछ वर्षों से दहाई अंको की अपनी विकास दर को लगातार कायम रखा है। राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ की विकास दर देश के अन्य राज्यों  के लिए भी अनुकरणीय है। सभी राज्यो को छत्तीसगढ़ जैसी विकास  दर हासिल करने का प्रयास करना चाहिए।
    श्री प्रणव मुखर्जी ने आज नई दिल्ली में उद्योग-व्यापार जगत से जुड़े संगठन पीएचडी (पंजाब-हरियाणा-दिल्ली)चेम्बर ऑफ कामर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज द्वारा आयोजित मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए। सम्मेलन में राष्ट्रपति ने पीएचडी चेम्बर ऑफ कॉमर्स की ओर से छत्तीसगढ़ को देश में सबसे कम बेरोजगारी दर वाले राजय के रूप में सम्मानित किया। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राष्ट्रपति के हाथों यह पुरस्कार और सम्मान ग्रहण किया। उल्लेखनीय है कि रोजगार तथा बेरोजगारी की स्थिति पर भारत सरकार की संस्था केन्द्रीय श्रम ब्यूरो ने पिछले वित्तीय वर्ष 2011-12 के अपने राष्ट्रीय सर्वेक्षण के बाद जारी रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ को देश के सबसे कम बेरोजगारी वाले राज्यके रूप में चिन्हांकित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज पी.एच.डी. चेम्बर के सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए यह पुरस्कार पूरी विनम्रता के साथ प्रदेश की जनता को समर्पित कर दिया। सम्मेलन में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री प्रेम कुमार धूमल, उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री विजय बहुगुणा, बिहार के उप मुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी, मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री श्री रामकृष्ण कुसमारिया और छत्तीसगढ़ के कृषि तथा श्रम मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू भी उपस्थित थे।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार राज्यमें बेरोजगारी दूर करने के लिए योजनाबद्ध ढंग से प्रयास कर रही है। इसके फलस्वरूप हमारे यहाँ रोजगार और स्वरोजगार का बेहतर वातावरण निर्मित हुआ है। हमारी कोशिश है कि लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के व्यापक अवसर प्राप्त हों। शासकीय सेवाओं में भी हमने बड़े पैमाने पर भर्तियां की हैं। हर साल लगभग छह हजार युवाओं को सरकारी नौकरियों में लिया जा रहा है। विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों, कृषि महाविद्यालयों, चिकित्सा महाविद्यालयों और पॉलिटेक्निक तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। खेती के लिए मात्र एक प्रतिशत ब्याज पर ऋण सुविधा देने के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ में किसानों में नया उत्साह जागा है और कृषि विकास की दर में भी तेजी आई है। इससे कृषि आधारित क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि राज्यकी लगातार दस प्रतिशत से अधिक विकास दर हमारी सार्वजनिक वितरण प्रणाली की सफलता, आम जनता, कृषि और उद्योगों के लिए चौबीसों घण्टे बिजली की आपूर्ति, बेहतर वित्तीय प्रबंधन और कृषि विकास दर की वजह से हासिल की जा सकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्यके सामाजिक-आर्थिक विकास का सकारात्मक असर वहां की जनता की सामाजिक स्थिति में भी झलकना चाहिए। छत्तीसगढ़ में इसे स्पष्ट देखा जा सकता है। डॉ. सिंह ने कहा कि लोकतंत्र पर आधारित समाज एवं शासन व्यवस्था में दुनिया के हर देश तथा हर राज्य में जनता के आदेश से सरकारों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन जनता की बेहतरी के लिए नीतियों की निरन्तरता हमेशा कायम रहनी चाहिए। इससे विकास की रफ्तार में तेजी आएगी।  
    डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बेरोजगारी कम करने के लिए प्रदेश के सभी जिलों में स्थानीय युवाओं के कौशल उन्नयन की कार्य योजना पर अमल शुरू किया है। उन्होंने कहा कि इसके अंतर्गत कम पढ़े लिखे बेरोजगारों को हुनरमंद बनाने के लिए उन्हें छोटे-छोटे लेकिन आम जनता की जरूरतों से जुड़े व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए एक माह से लेकर तीन माह और छह माह के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राज्यसरकार ने इस सिलसिले में बहुत जल्द   कौशल गुरूकुल   (स्किल गुरूकुल) नामक योजना भी शुरू करने जा रही है। इस योजना में कम पढ़े-लिखे युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के आदिवासी बहुल जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा में राज्यसरकार ने युवाओं को स्वरोजगार प्रशिक्षण देने के लिए आजीविका महाविद्यालय (लाईवली हुड कॉलेज) की स्थापना की है, जिसका संचालन सफलता पूर्वक किया जा रहा है।
    डॉ. रमन सिंह ने कहा कि अगर राज्यको बेरोजगारी की समस्या दूर करनी हो तो इसके लिए कौशल उन्नयन प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में राज्यसरकार ने वनों को भी स्थानीय जनता के लिए रोजगार से जोड़ा है। तेंदूपत्ता सहित लघु वनोपजों के कारोबार में लाखों वनवासी परिवारों को रोजगार मिल रहा है।  डॉ. सिंह ने कहा कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की संयुक्त भागीदारी से पीपीपी मॉडल का देश का पहला रेल कॉरिडोर में छत्तीसगढ़ में बनने जा रहा है। इसके लिए राज्यसरकार ने स्वयं के संसाधनों से कार्य योजना बनाई है, जिसे हमारे आग्र्रह पर केन्द्र ने स्वीकृति दी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि लगभग छह हजार करोड़ रूपये का यह रेल कॉरिडोर 452 किलोमीटर का होगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने राज्यमें रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कई उपाय किये हैं। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि पी.पी.पी. मॉडल का यह रेल कॉरिडोर देश के अन्य राज्यों  के लिए भी विकास का एक अच्छा मॉडल साबित होगा। उन्होंने राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ में अमीर-गरीब के भेदभाव से परे सभी छप्पन लाख परिवारांे को शामिल कर स्वास्थ्य बीमा योजना का भी उल्लेख किया और कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्यहै, जहां पूरी दो करोड़ 55 लाख की आबादी को स्वास्थ्य बीमा के दायरे में लाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस योजना में प्रत्येक परिवार को स्मार्ट कार्ड के आधार पर सालाना तीस हजार रूपए तक निःशुल्क इलाज की सुविधा मिलेगी। डॉ. सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और कुपोषण की दर को कम करने में भी हाल के वर्षाे में अच्छी सफलता हासिल की है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी कोशिश है कि राज्यकी प्राकृतिक सम्पदा का राज्यमें ही वेल्यू-एडीशन करने के लिए उन पर आधारित उद्योग निवेशकों के सहयोग से स्थानीय स्तर पर लगाए जाएं। डॉ. सिंह ने बताया कि उनकी सरकार ने पिछले महीने रायमें पहली बार गैर कोर सेक्टर के डाउन स्ट्रीम के उद्योगों में पूंजी निवेश आकर्षित करने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट का आयोजन किया। इसमें देश-विदेश के निवेशकों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। लघु वनोपज, खाद्य प्रसंस्करण, आटो मोबाइल तथा सूचना प्रौद्योगिकी और हस्तशिल्प जैसे कम लागत के क्षेत्रों में निवेशकों ने पूंजी निवेश में रूचि दिखाई बड़ी संख्या में कंपनियों ने लगभग सवा लाख करोड़ रूपये के पूंजी निवेश के लिए एमओयू किया जिनमें करीब सवा छह लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस दौरान केन्द्र सरकार के उपक्रम भारतीय इस्पात प्राधिकरण तथा छत्तीसगढ़ सरकार के राज्यखनिज विकास निगम के बीच पांच हजार करोड़ रूपये के निवेश का करार हुआ है। इससे भिलाई इस्पात संयंत्र को लौह अयस्क की आपूर्ति के साथ नया जीवन मिलेगा। कवर्धा तक रेल लाईन का विस्तार होगा। राजनांदगांव और कवर्धा में मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यसरकार सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में  भी निवेश को बढ़ावा दे रही है। यह एक ऐसा क्षेत्र हैं, जिसमें मात्र दस करोड़ रूपये की पूंजी लगाकर पांच सौ लोगों को रोजगार दिया जा सकता है,जबकि एक हजार मेगावाट के किसी बिजली संयंत्र में अगर छह हजार करोड़ रूपये का पंूजी निवेश होता है तो उसमें केवल सात सौ लोगों को रोजगार मिलता है। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी जैसे डाउन स्ट्रीम के उद्योगों में रोजगार की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए रायसरकार इसके लिए भी कार्य योजना बना रही है। सम्मेलन में छत्तीसगढ़ सरकार के वाणिय और उद्योग विभाग के सचिव श्री दिनेश श्रीवास्तव, मुख्यमंत्री के सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मण्डल के आयुक्त और संचालक जनसम्पर्क श्री सोनमणि बोरा, छत्तीसगढ़ राज्यऔद्योगिक विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री देवेन्द्र सिंह और मुख्यमंत्री के ओ.एस.डी. श्री विक्रम सिसोदिया भी उपस्थित थे।

क्रमांक-3891/स्वराज्य



 

Date: 
15 Dec 2012