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रायपुर : स्वच्छ भारत अभियान : छत्तीसगढ़ की जिला और जनपद पंचायतों में बनेंगी स्थायी स्वच्छता समितियां

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ग्राम पंचायतों में शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण
समिति को स्वच्छता कार्यक्रम की जिम्मेदारी

रायपुर, दो मार्च 2015

स्वच्छ भारत अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन में पंचायतों की सक्रिय भागीदारी के लिए राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में त्रि-स्तरीय पंचायत राज संस्थाओें में स्वच्छता समितियों के गठन का निर्णय लिया है। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने यहां मंत्रालय (महानदी भवन) से इस आशय का परिपत्र प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और जिला पंचायतों तथा जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को जारी कर दिया है। इन समितियों के द्वारा स्वच्छता के संबंध में आम जनता में जागरूकता लाने और ग्रामीणों को प्रोत्साहित करने तथा इसमें जनभागीदारी के लिए कार्य योजना बनाकर उस पर अमल किया जाएगा।
इस सिलसिले में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 86 (एक) के द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार ने निर्देश दिए हैं कि जिला पंचायतों और जनपद पंचायतों में वर्तमान में गठित पांच स्थायी समितियों के गठन का प्रावधान है, जिनमें जिला पंचायतों के अंतर्गत सामान्य प्रशासन, कृषि, शिक्षा, संचार तथा संकर्म और सहकारिता तथा उद्योग समिति और जनपद पंचायतों में सामान्य प्रशासन, निर्माण और विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण, कृषि, पशुपालन और मछली पालन तथा राजस्व और वन स्थायी समिति शामिल है।  राज्य सरकार ने अपने परिपत्र में इन समितियों के अलावा छठ्वीं समिति के रूप में स्वच्छता समिति का भी अलग से गठन करने के निर्देश दिए हैं। स्वच्छता समितियों में संबंधित पंचायतों के कम से कम पांच निर्वाचित सदस्य होंगे। उनके अलावा संबंधित पंचायत क्षेत्र के नौ ऐसे लोगों को जो स्वैच्छिक रूप से समिति में योगदान देंगे, उन्हेें नामांकित किया जाएगा। नामांकित होने वाले व्यक्ति किसी सामाजिक संस्था के प्रतिनिधि अथवा सामाजिक क्षेत्र में ख्याति प्राप्त होने के साथ-साथ स्वच्छता, स्वास्थ्य और प्रदूषण निवारण के क्षेत्र में विषय विशेषज्ञ भी हो सकते हैं। स्वच्छता समिति में महिला तथा समाज के कमजोर व्यक्तियों को भी शामिल किया जाएगा। पंचायत राज अधिनियम की धारा 46 के तहत यह प्रावधान है कि ग्राम पंचायतों द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए स्थायी समिति गठित की जा सकती है। इन समितियों में एक महत्वपूर्ण समिति शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण समिति भी है। इस समिति के अधीन ग्राम पंचायत क्षेत्र में आरोग्य और स्वच्छता कार्य भी शामिल है। अधिनियम की धारा 49 (एक) के तहत स्वच्छता और सफाई कार्य ग्राम पंचायतों के कार्यों में शामिल है। ग्राम पंचायत क्षेत्रों में स्वच्छता कार्यक्रम उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण समिति द्वारा संचालित किया जाएगा। इस समिति में निर्वाचित सदस्य होंगे। सरपंच इस समिति के सभापति और उप सरपंच पदेन सदस्य होंगे। यह समिति अधिकतम दो ऐसे लोगों को सहयोजित कर सकेगी, जिन्हें उस समिति को सौंपे गए विषयों का अनुभव या विशेष ज्ञान हो।
अधिकारियों ने बताया कि परिपत्र के अनुसार ग्राम पंचायत में स्वच्छता कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नौ विषय विशेषज्ञों को सलाह देने के लिए आमंत्रित कर सकेंगे। ऐसे व्यक्ति स्थानीय स्तर पर सामाजिक क्षेत्र में ख्याति प्राप्त हो सकते हैं या किसी ख्याति प्राप्त सामाजिक संस्था के प्रतिनिधि भी हो सकते हैं। समिति में महिला और समाज के कमजोर वर्गों के व्यक्तियों को शामिल किया जाएगा। ग्राम पंचायत में गठित शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण समिति में स्थायी समिति के सचिव के रूप में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, ए.एन.एम. अथवा ग्रामीण विकास विभाग के सहायक विकास विस्तार अधिकारी को दायित्व सौंपा जा सकेगा। ग्राम पंचायत के सचिव इस समिति के संयोजक होंगे। जिला पंचायतों और जनपद पंचायतों में ख्याति प्राप्त और विषय विशेषज्ञ के रूप में नौ लोगों को कलेक्टर द्वारा तथा ग्राम पंचायतों के मामले में ऐसे नौ लोगों को संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा नामांकित किया जाएगा। जिला पंचायतों और जनपद पंचायतों में गठित की जाने वाली स्वच्छता समिति के सचिव का दायित्व वहां के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को सौंपा जाएगा। विभाग द्वारा यह परिपत्र 28 फरवरी को जारी किया जा चुका है।

क्रमांक-4070/स्वराज्य

Date: 
02 Mar 2015