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रायपुर : कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर को उत्कृष्ट कार्यों के लिए फिर एक बार मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

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पिछले चार साल में तीन बार मिल चुका है राष्ट्रीय पुरस्कार

केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन सिंह ने किया पुरस्कृत

मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री ने केन्द्र के
अधिकारियों-कर्मचारियों और किसानों को दी बधाई

    रायपुर, 03 फरवरी 2017

छत्तीसगढ़ के नक्सल हिंसा पीड़ित आदिवासी बहुल कांकेर जिले के मुख्यालय कांकेर में संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र को उत्कृष्ट कार्यो के लिए एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार मिला है। यह केन्द्र अच्छे कार्यो के लिए विगत चार सालों में तीन बार राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार जीत चुका है। केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन सिंह ने कल नई दिल्ली में महेन्द्रा समृद्धि नई दिल्ली द्वारा आयोजित समारोह में कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केन्द्र के पुरस्कार से नवाजा। इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्रीद्वय श्री सुदर्शन भगत एवं श्री पुरूषोत्तम रूपाला भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, कृषि मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर के अधिकारियों-कर्मचारियों और जिले के किसानों को राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटिल, कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. बीरबल साहू, कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान जबलपुर के निदेशक डॉ. अनुपम मिश्रा, विस्तार सेवाएं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक डॉ. एम.के. ठाकुर ने संयुक्त रूप से पुरस्कार ग्रहण किया।
    गौरतलब है कि कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर को उत्तम कार्यों के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा ’अटल राष्ट्रीय कृषि विज्ञान प्रोत्साहन पुरस्कार 2016’ तथा ’बेस्ट जोनल एवार्ड 2012’ द्वारा से पुरस्कृत किया जा चुका है। इसी प्रकार इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर ने वर्ष 2015 में इस केन्द्र को राज्य के सर्वश्रेष्ठ विज्ञान केन्द्र का पुरस्कार दिया है।
    इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि कृषि विज्ञान केन्द्र को कल मिले पुरस्कार में अधोसंरचना विकास के लिए ढाई लाख रूपए और प्रशस्ति पत्र दिया गया है । कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर द्वारा जिला प्रशासन कांकेर के सहयोग से कांकेर जिले के छोटे-छोटे किसानों के जीवन में बदलाव लाने के लिए अनेक अनुकरणीय कार्य किए गए हैं। कांकेर जिले के किसान मुख्य रूप से परम्परागत खेती करते आ रहे हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा कांकेर जिले के लघु और सीमांत किसानों के लिए समन्वित कृषि प्रणाली का मॉडल तैयार किया गया है। केन्द्र द्वारा वर्ष 2008 से कांकेर जिले के किसानों विशेष तौर पर अनुसूचित जनजातीय वर्ग के लघु एवं सीमांत किसानों को नई तकनीक से खेती करने प्रेरित किया जा रहा है। इसके अलावा सामूहिक रूप से साग-सब्जी की खेती, विपणन, कुक्कुट पालन विशेष रूप से कड़कनाथ मुर्गे के संरक्षण, बकरियों के उत्तम नस्ल ’सिरोही’ के संरक्षण, धान की कतार बोनी, पोषण वाटिका, कृषि आधारित स्वरोजगार स्थापित करने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण, किसानों की सहभागिता से विभिन्न फसलों के बीज उत्पादन, दलहन और तिलहन फसल लेने किसानों को प्रोत्साहित करने जैसे खास कार्य किए गए हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर द्वारा जिले के आवासीय आदिवासी स्कूलों में किचन गार्डन उनका सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। इससे स्कूली बच्चों को ताजी साग-सब्जी खाने को मिलती है। किचन गार्डन से इन बच्चों को आमदनी भी हो रही है। किचन गार्डन कार्यक्रम को प्रदेश के अन्य जिलों के कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से भी संचालित किया जा रहा है।
    पुरस्कार वितरण समारोह में केन्द्रीय कृषि सचिव श्री एस.के. पटनायक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र, महिन्द्रा ग्रुप के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री आनंद महिद्रा सहित अनेक कृषि वैज्ञानिक उपस्थित थे।  


क्रमांक-5434/राजेश

Date: 
03 Feb 2017