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दुर्ग : 15 अक्टूबर को मनाया जायेगा विश्व हाथ धुलाई दिवस

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दुर्ग, 10 अक्टूबर 2014/जिला प्रशासन द्वारा 15 अक्टूबर विश्व हाथ धुलाई दिवस को पूरे दुर्ग जिले में एक रूपता के साथ मनाने की योजना तैयार की गई है। जिसके अंतर्गत पूरे शासकीय शालाओं में बच्चों को 15 अक्टूबर 2014 तक हाथ धोने के सही तरीकों को सिखाया जायेगा, हाथ धोने के लाभ के बारे में बताया जायेगा तथा हाथ ना धोने से किन-किन बीमारियों से ग्रस्त हो सकते हैं इसकी जानकारी दी जायेगी। इस कार्य के मैदानी स्तर पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने हेतु 08 एवं 09 अक्टूबर को विकासखंड पाटन के शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक शाला पाटन, दुर्ग विकासखण्ड में विश्वदीप स्कूल एवं धमधा विकासखण्ड स्त्रोत केन्द्र में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्य शाला में सुश्री सौम्या चौरसिया अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) विकासखंड पाटन, श्री कैलाश मढ़रिया, कार्यपालन अभियंता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खंड दुर्ग, श्री कच्छप कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास दुर्ग छत्तीसगढ़, श्री गिरीश माथुरे जिला समन्वयक स्वच्छ भारत अभियान दुर्ग छत्तीसगढ, श्री बघेल विकासखंड शिक्षा अधिकारी पाटन, जिला परियोजना प्रबंधक स्वास्थ्य विभाग दुर्ग आदि द्वारा कुल 2500 प्रतिभागियों को दो चरणों मे स्वच्छता एवं हाथ धुलाई दिवस का प्रशिक्षण एवं जानकारी दी गई़। प्रथम चरण में विकासखंड पाटन के प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला के प्रधानपाठकों को जानकारी दी गई तथा द्वितीय चरण में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया।
    प्रशिक्षण के आरंभ में स्वच्छता के सात आयाम पेयजल का सुरक्षित रख रखाव,  बेकार पानी का सुरक्षित निपटान, मानव मल का सुरक्षित निपटान, ठोस कचरे का निपटान, व्यक्तिगत स्वच्छता एवं सफाई, घर एवं भोजन की स्वच्छता, सामुदायिक एवं ग्रामीण स्वच्छता की जानकारी दी गई।
    श्री कैलाश मढ़रिया ने जानकारी दी कि मानव समाज कई वर्षों से हाथ धोना जैसी गतिविधि को करते आ रहा है एवं करता रहेगा। परंतु हमें जोर इस बात पर देना है कि, कुछ ऐसे विशेष अवसर जैसे कि भोजन करने से पूर्व, शौच से आने के बाद, काम करने के बाद, बच्चों के मल की सफाई के बाद, भोजन बनाने से पहले, पेयजल भरने से पहले, बच्चों को भोजन खिलाने एवं परोसने से पहले अनिवार्यतः मात्र साबुन से हाथ धोना चाहिये। साबुन से हाथ धोये बिना भोजन करने से हमारे हाथ के कीटाणु हमारे पेट में चले जाते हैं जिससे मानव को लगभग 80 प्रतिशत बीमारियां हो सकती हैं। एक ग्राम मानव मल में कितने कीटाणु, जीवाणु, विषाणु परजीवी शिष्ट, परजीवी अंडे होते हैं। एक व्यक्ति एक दिन में 250 ग्राम मल त्याग करता है, यदि एक परिवार में चार व्यक्ति रहते हैं तथा एक गांव में 100 परिवार निवास करते हैं तो प्रतिदिन 100 किलो मानव मल शौचालय ना होने की अवस्था में खुले में पड़ा रहता है। इस प्रकार एक माह में 3000 किलो मानव मल हमारे ग्रामों में खुले में पड़ा रहता है जो कि, हमारे भोजन एवं पेयजल स्त्रोतों में मिल कर हमें बीमार कर देता है। जिससे हमें पीलिया, डायरिया, फाईलेरिया, कोलेरा आदि बीमारियां होजातीं हैं जिससे लोगों की अकाल मृत्यु हो जाती है।हाल ही में पीलिया के प्रकोप से दुर्ग जिले में 100 से भी अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है।
    सुश्री सौम्या चौरसिया द्वारा यह जानकारी दी गई कि, कलेक्टर द्वारा पूरे दुर्ग जिले में स्वच्छ भारत अभियान को प्राथमिकता के क्रम में रख कर कार्य करने की योजना तैयार की गई है तथा विकासखंड पाटन को  संपूर्ण रूप से निर्मल ग्राम बनाने का प्रयास किया जाएगा। यह सफलता तभी प्राप्त होगी जब सभी का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा। प्रशिक्षण में उपस्थित सभी शिक्षक पूर्णतः शिक्षित एवं अनुभवी वर्ग हैं। जो पूरे समाज को अच्छी शिक्षा दे कर समाज के नींव का पत्थर बनते हैं यदि आपके द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर ग्रामीणों एवं बच्चों को स्वच्छता एवं हाथ धोने संबंधी जानकारियां देंगे तो वे जरूर आपकी बातों को गंभीरता से विचार कर अनुसरण करेंगे तथा बच्चों द्वारा सीखी हुई अच्छी बातें अपने पालकों को बताएंगे तो उनके माता पिता भी स्वच्छता की ओर कदम बढ़ायेंगे। यह कार्यक्रम 25 सितंबर से 31 अक्टूबर 2014 तक के लिये चलाया जा रहा है परंतु यदि इस अवधि के पश्चात लोग पुनः गंदगी फैलाना शुरू कर देते हैं तो इस दौरान किये गए हमारे सारे प्रयास असफल सिद्ध होंगे। अतः उपस्थित सभी प्रतिभागियों को कहा गया कि, इस अवधि के पश्चात भी यह कार्यक्रम निरंतर चलता रहेगा। शिक्षकों को यह निर्देश दिये गए कि, प्रतिदिन बच्चों को प्रार्थना में स्वच्छता संबंधी सुविचार, वादविवाद प्रतियोगिता, निबंध, चित्रकला, रंगोली, नारे लेखन, रैली, शौचालयों की साफसफाई, स्वच्छता किट वितरण किया जायेगा। स्वच्छता किट अंतर्गत नेल कटर, कंघी, आईना, डस्टबिन, झाड़ू, उचित पेयजल व्यवस्था(गिलास ड्रम) की व्यवस्था की जायेगी। इस गतिविधि के दौरान सभी बच्चों को अपने अभिभावकों से अपनी नोट बुक में स्वच्छता संबंधी अच्छे विचारों को एवं उनकी प्रतिक्रियाओं को लिख कर लाना है। जिस बालक का संदेश एवं विचार सबसे अच्छा होगा उन्हें सुश्री सौम्या चौरसिया द्वारा प्रथम पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।
    विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री बघेल द्वारा शाला स्तर पर चलाई जाने वाली समस्त गतिविधियों की जानकारी देते हुए आग्रह किया गया कि, शाला एवं ग्राम स्तर पर की गई गतिविधियों का दस्तावेजीकरण एवं फोटोग्राफ्स एक नवंबर को अनिवार्य रूप से जमा करें। तत्पश्चात स्वच्छ भारत के श्री कैलाश मढ़रिया एवं गिरीश माथुरे जिला समन्वयक द्वारा उपस्थित प्रतिभागियों में से एक-एक प्रतिभागी को हाथ धोने का प्रदर्शन करके बताया गया। हाथ धोने की गतिविधि में सर्वप्रथम एक पात्र में केवल पानी से हाथ धोकर पात्र में एकत्रित गंदे पानी को पारदर्शी कांच के गिलास में डाल कर सभी प्रतिभागियों को दिखाया गया। दूसरे चरण में साबुन से हाथ धोने के सात चरणों का विधिवत् डिमॉंस्ट्रेशन कर बताया गया। इस प्रदर्शन के पश्चात उपस्थित प्रतिभागियों ने जागरूकता नजर आई एवं उन्होनें शपथ ली कि, वे प्रतिदिन नियमित रूप से शालाओं में स्वच्छता संबंधी गतिविधि करवायेंगे तथा सभी को हाथ धोने की महत्ता को बतायेंगे। कार्यक्रम के अंत में श्री कच्छप द्वारा विभागीय गतिविधियों को करने के निर्देश देते हुए 0-6 वर्ष के बच्चे एवं उनकी माताओं को स्वच्छता एवं हाथ धुलाई की विशेषताओं से अवगत करवायेंगे जिससे कि, वे बच्चे शाला में दाखिल होते तक स्वच्छता एवं हाथ धोने के महत्व को समझ जायेंगे।
    श्री जीवन विकासखंड समन्वयक पाटन, स्वच्छ भारत अभियान द्वारा ग्राम पंचायतों में निर्मित शौचालयों के उपयोग ना होने की बात बताते हुए सभी से आग्रह किया कि, विशेषकर आंगनबाड़ी कार्य कर्ता घर-घर संपर्क के दौरान शौचालय के उपयोग एवं नवनिर्माण हेतु लोगों को प्रोत्साहित करें। प्रशिक्षण में दुर्ग, पाटन एवं धमधा के प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला के एक-एक शिक्षक, सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, महिला  एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षक, चिकित्सक, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ, बीआरसी एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित थे।
क्रमांक- 968/प्रभाकर

Date: 
10 Oct 2014